उठा तू शस्त्र आज,
जब दुश्मन न आये बाज।
है डर तुझे किस बात का?
है दिन का है या रात का?
बस चल अपने पथ पे,
अपने सर्व विजयी रथ पे।
तू अकेला कब खड़ा था?
जब तू सच पर चल पड़ा था?
हज़ारों साथ आएँगे,
तेरे संग रक्त बहाएंगे।
उठा तू शस्त्र आज ,
बस उठा तू शस्त्र आज।
जीत की न परवाह कर,
पूरा अपना कर्म कर।
जब तू अँधेरे में जाएगा,
अपना देश साथ पायेगा।
तू युद्ध की हुंकार कर,
धारण रूप खूंखार कर।
देख तुझे वो थर्रायेगा,
अपनी जमीं को लौट जाएगा।
न राम को न रावण को,
न भीष्म को न श्रवण को,
इस देश को तू याद आएगा,
जब तू पहला कदम उठाएगा।
बस उठा तू शास्त्र आज,
क्योंकि दुश्मन न आये बाज।
Shreyas Om
