बालिग़ हुए तो घर से हम निकले,क्या करने उसका कुछ ज़्यादा हिसाब ना था।बन जाएँगे शायद कुछ कहीं पहुँच कर,किसी मंज़िल पर जा कर कुछ…
Grain for Brain
बालिग़ हुए तो घर से हम निकले,क्या करने उसका कुछ ज़्यादा हिसाब ना था।बन जाएँगे शायद कुछ कहीं पहुँच कर,किसी मंज़िल पर जा कर कुछ…