थकान के आगे, चट्टान के पार, एक दुनिया है, जहाँ औरत रहती है। तुम लाख करो परेशान उसे, वो बलशाली है, इसलिए सहती है। उसकी…
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उठा तू शस्त्र आज, जब दुश्मन न आये बाज। है डर तुझे किस बात का? है दिन का है या रात का? बस चल अपने…
मैं क्या लिखूं तेरे लिए कविता, तू तो सब जानती है न माँ। क्या समझाऊँ अपने मन की गीता, तू तो सब समझती है न…
