मैं क्या लिखूं तेरे लिए कविता, तू तो सब जानती है न माँ। क्या समझाऊँ अपने मन की गीता, तू तो सब समझती है न…
Month: May 2019
हों पंख मेरे या न हो, मुझे अब डरना नही आता है, रोको मत अब चलने का लालच न दो, मुझे केवल उड़ना आता है।…
Grain for Brain
मैं क्या लिखूं तेरे लिए कविता, तू तो सब जानती है न माँ। क्या समझाऊँ अपने मन की गीता, तू तो सब समझती है न…
हों पंख मेरे या न हो, मुझे अब डरना नही आता है, रोको मत अब चलने का लालच न दो, मुझे केवल उड़ना आता है।…