मुझे केवल उड़ना आता है । ?️

हों पंख मेरे या न हो,

मुझे अब डरना नही आता है,

रोको मत अब चलने का लालच न दो,

मुझे केवल उड़ना आता है।

 

अब मेरी उड़ान इन पर्वतों से नही कतराते हैं,

आंधी ने देख हौसला मेरा , रास्ते अलग नापे हैं।

जलती नहीं अब सूरज की गर्मी से,

इससे ज्यादा मेरे सपनो की ज्वाला है,

मतलब नहीं अब इन  कांटो से,

मुझे केवल उड़ना आता है।

 

घनघोर घटाएं चीर दूँ मैं, ऐसी मेरी उड़ान है,

मंजिल की प्यास है भारी, न दुःख है न थकान है।

मेरे सपने आँखों में चमकते हीरों की पहचान है,

मत रोको, खुद पे ऐतबार करो,

मुझे तो केवल उड़ना आता है।

 

मैं रोई हूँ उन रातों को जब सारी दुनिया हसती थी,

मैं टूटी हूँ सौ बार जैसे मैं कांच की कोई हस्ती थी।

पर चौंका के सबको यारों मुझे जीतना आता है,

तुम सोचो और मैं आगे, मुझे केवल उड़ना आता है।

 

अब रात दिखा के डरा मत,

आँख दिखा के सता मत,

दीप जलाना अब मुझे भी आता है।

बारीश की बूंदों में भी अपना रास्ता ढूंढना आता है,

मुझे केवल उड़ना आता है,

मुझे केवल उड़ना आता है।

 

– तान्या ग्रेन

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