मुझे केवल उड़ना आता है । 🕊️

हों पंख मेरे या न हो,

मुझे अब डरना नही आता है,

रोको मत अब चलने का लालच न दो,

मुझे केवल उड़ना आता है।

 

अब मेरी उड़ान इन पर्वतों से नही कतराते हैं,

आंधी ने देख हौसला मेरा , रास्ते अलग नापे हैं।

जलती नहीं अब सूरज की गर्मी से,

इससे ज्यादा मेरे सपनो की ज्वाला है,

मतलब नहीं अब इन  कांटो से,

मुझे केवल उड़ना आता है।

 

घनघोर घटाएं चीर दूँ मैं, ऐसी मेरी उड़ान है,

मंजिल की प्यास है भारी, न दुःख है न थकान है।

मेरे सपने आँखों में चमकते हीरों की पहचान है,

मत रोको, खुद पे ऐतबार करो,

मुझे तो केवल उड़ना आता है।

 

मैं रोई हूँ उन रातों को जब सारी दुनिया हसती थी,

मैं टूटी हूँ सौ बार जैसे मैं कांच की कोई हस्ती थी।

पर चौंका के सबको यारों मुझे जीतना आता है,

तुम सोचो और मैं आगे, मुझे केवल उड़ना आता है।

 

अब रात दिखा के डरा मत,

आँख दिखा के सता मत,

दीप जलाना अब मुझे भी आता है।

बारीश की बूंदों में भी अपना रास्ता ढूंढना आता है,

मुझे केवल उड़ना आता है,

मुझे केवल उड़ना आता है।

 

– तान्या ग्रेन

12 Replies to “मुझे केवल उड़ना आता है । 🕊️”

  1. Mai tumhari kavita se bahot prabhavit hui. Mujhe tum pe poora bharosa ki tum hamesha apne armaano k pankh laga k udogi aur dharatal pe apne uplabdhiyan sehejti rahogi.

  2. मुझे बहुत गर्व है कि तुमने इतनी अच्छी कविता लिखी। ये सबके लिए बहुत परेरणा दायक है।

  3. Neer no do chahe tahni ka asharey chhinbhin ker dalo/lekin pankh diye ho to aakul uran me bighan na dalo. Hindi me bhi hamari beti likhti hai yah jan ker bahut khushi huie. Biyogi hoga pahla kavi aah se upja hoga gayan/nikalker aaho se chupchap bani hogi kavita anjan. Bahut achchhi kavita. Shubhkamna.

  4. Beta itni lambi udaan ho tumhari ki is duniya ki nigahein wo doori naap hi na paayein…..
    God blezz

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